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DAILY DOSE कार्यक्रम, IAS From Home का ऑनलाइन मेण्टरशिप कार्यक्रम है। घर से UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को समर्पित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिदिन के अध्ययन में अभ्यर्थियों की सहायता करना एवं उन्हें परीक्षा सम्बन्धी नियमित मार्गदर्शन प्रदान करना है ताकि उनकी तैयारी निरन्तर एवं सही दिशा में चलती रहे। इस कार्यक्रम में एक ऑडियो लेक्चर तथा मुख्य परीक्षा एवं प्रारम्भिक परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न शामिल होते हैं।
आज की विषयवस्तु
- पर्यावरण क्या है?
- परिभाषा
- पर्यावरण की विशेषताएँ
- पर्यावरण के प्रकार
- पर्यावरण के घटक
- अजैविक घटक
- जैविक घटक
- पृथ्वी पर पर्यावरण का विकास
- भूवैज्ञानिक समय मापक्रम
- पृथ्वी: एक आग का गोला
- आरम्भिक वायुमण्डल
- महासागरों का निर्माण
- एक कोशीय जीव
- वायुमण्डल में ऑक्सीजन
- बहुकोशीय जीवों की उत्पत्ति
- वर्तमान जैवमण्डल
- पर्यावरण के अंग
- स्थलमण्डल
- जलमण्डल
- वायुमण्डल
- जैवमण्डल
- पर्यावरण एवं मानव समाज
- मानव-पर्यावरण सम्बन्ध
- मानव पर पर्यावरणीय प्रभाव
- पर्यावरण पर मानवीय प्रभाव
- ग्रहीय सीमाओं की अवधारणा
- ग्रहीय सीमाएँ क्या हैं?
- सभी (9) ग्रहीय सीमाओं का संक्षिप्त परिचय
- ग्रहीय सीमाओं की अवधारणा की उपयोगिता
आज का गृहकार्य (होमवर्क)
निम्नलिखित में से किसी एक प्रश्न के उत्तर लेखन का अभ्यास अवश्य करें। सम्भव हो, तो तीनों के उत्तर लिखें।
- "पर्यावरण केवल एक भौतिक स्थान नहीं है, बल्कि एक गतिशील स्व-नियामक तंत्र है।" इस कथन के आलोक में पर्यावरण की प्रमुख विशेषताओं की चर्चा कीजिए। [150 शब्द]
- "एन्थ्रोपोसीन (Anthropocene) युग ने मानव-पर्यावरण संबंधों को 'मैत्रीपूर्ण' से 'विनाशकारी' में बदल दिया है।" टिप्पणी कीजिए। [150 शब्द]
- "ग्रहीय सीमाओं" (Planetary Boundaries) की अवधारणा क्या है? वर्तमान वैश्विक पर्यावरणीय संकटों के समाधान में यह अवधारणा कितनी प्रासंगिक है? [250 शब्द]
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास
निर्देश:—
नीचे दिये गये अभ्यास प्रश्न पिछले वर्षों में सिविल सेवा परीक्षा में पूछे जा चुके हैं। यदि आपने इनमें से किसी एक प्रश्न का भी उत्तर लेखन अभ्यास किया है, तो इस Quiz के नीचे लगे बटन पर क्लिक करें। आपकी मासिक रिपोर्ट में यह अभ्यास जोड़ दिया जायेगा।
मुख्य परीक्षा (पिछले वर्षों के प्रश्न: 2022-2023)
- इसके निर्माण, प्रभाव और शमन को महत्त्व देते हुए फोटोकेमिकल स्मॉग की विस्तारपूर्वक चर्चा कीजिए। 1999 के गोथेनबर्ग प्रोटोकॉल को समझाइए। [150 शब्द]
- ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक तापन) की चर्चा कीजिए और वैश्विक जलवायु पर इसके प्रभावों का उल्लेख कीजिए। क्योटो प्रोटोकॉल, 1997 के आलोक में ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनने वाली ग्रीनहाउस गैसों के स्तर को कम करने के लिए नियंत्रण उपायों को समझाइए। [250 शब्द]
- भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय आर्द्रभूमि संरक्षण कार्यक्रम पर टिप्पणी कीजिए और रामसर स्थलों में शामिल अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की भारत की कुछ आर्द्रभूमियों के नाम लिखिए। [250 शब्द]
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु अभ्यास
निर्देश:—
इस प्रश्नावली में कुल 10 प्रश्न हैं, जो पिछले वर्षों में सिविल सेवा परीक्षा में पूछे जा चुके हैं। प्रत्येक प्रश्न 2 अंकों का है। गलत उत्तर पर एक तिहाई (⅓) ऋणात्मक मूल्यांकन किया जाएगा। न्यूनतम 50% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।
प्रारम्भिक परीक्षा (पिछले वर्षों के प्रश्न: 2022-2023)
शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में वाणिज्यिक कृषि का संवर्धन
आनुवंशिकतः रूपांतरित पुष्पों का प्रयोग कर उद्यानों का विकास
शहरी क्षेत्रों में लघु वनों का सृजन
तटीय क्षेत्रों और समुद्री सतहों पर पवन ऊर्जा का संग्रहण
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
- यह जापानी वनस्पतिशास्त्री अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित एक तकनीक है।
- इसका उपयोग शहरी क्षेत्रों जैसे कम स्थान वाले स्थानों में घने और देशी वनों के निर्माण के लिए किया जाता है।
- इस पद्धति से उगाए गए वन पारंपरिक वनों की तुलना में 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं और 30 गुना अधिक घने होते हैं।
आर्द्रभूमियों के जल चक्र में सतही अपवाह, अवमृदा अंतःस्रवण और वाष्पन शामिल होते हैं।
शैवालों से वह पोषक आधार बनता है, जिस पर मत्स्य, परुषकवची (क्रश्टेशिआई), मृदुकवची (मोलस्क), पक्षी, सरीसृप और स्तनधारी फलते-फूलते हैं।
आर्द्रभूमियाँ अवसाद संतुलन और मृदा स्थिरीकरण बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
जलीय पादप भारी धातुओं और पोषकों के आधिक्य को अवशोषित कर लेते हैं।
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
जिस प्रकार गुर्दे शरीर से अपशिष्ट और विषाक्त पदार्थों को छानकर रक्त को साफ करते हैं, उसी प्रकार आर्द्रभूमियाँ जल से प्रदूषकों, भारी धातुओं और अतिरिक्त पोषक तत्वों को छानकर जल को शुद्ध करती हैं।
- अल्फाल्फा
- चौलाई (ऐमरंथ)
- चना (चिक-पी)
- तिपतिया घास (क्लोवर)
- कुलफा (पर्सलेन)
- पालक
नीचे दिए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
केवल 1, 3 और 4
केवल 1, 3, 5 और 6
केवल 2, 4, 5 और 6
1, 2, 4, 5 और 6
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
- नाइट्रोजन स्थिरीकरण मुख्य रूप से फलीदार (Leguminous) पौधों द्वारा किया जाता है।
- अल्फाल्फा, चना और तिपतिया घास (Clover) फलीदार पौधे हैं जिनकी जड़ों में राइजोबियम बैक्टीरिया पाया जाता है।
- चौलाई, कुलफा और पालक फलीदार श्रेणी में नहीं आते हैं और वे नाइट्रोजन स्थिरीकरण नहीं करते।
गोल्डन महासीर
इंडियन नाइटजार
स्पूनबिल
व्हाईट आइबिस
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
- गोल्डन महासीर (Tor putitora) ताजे पानी की एक मछली है, जिसे 'हिमालयी महासीर' भी कहा जाता है।
- इंडियन नाइटजार, स्पूनबिल और व्हाईट आइबिस तीनों ही पक्षियों की प्रजातियाँ हैं।
- भारत में जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ नागोया प्रोटोकॉल के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए प्रमुख कुंजी हैं।
- जैव विविधता प्रबंधन समितियों के, अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत, जैविक संसाधनों तक पहुँच के लिए संग्रह शुल्क लगाने की शक्ति सहित, पहुँच और लाभ सहभागिता निर्धारित करने के लिए, महत्त्वपूर्ण प्रकार्य हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
- जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ (BMC) जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत स्थानीय निकायों द्वारा बनाई जाती हैं।
- ये समितियाँ नागोया प्रोटोकॉल (ABS - Access and Benefit Sharing) को जमीनी स्तर पर लागू करने में मदद करती हैं।
- उन्हें अपने क्षेत्र के जैविक संसाधनों के उपयोग पर संग्रह शुल्क (Collection fee) लगाने का संवैधानिक अधिकार है।
एक बार यदि केन्द्र सरकार किसी क्षेत्र को 'समुदाय प्रारक्षित' अधिसूचित कर देती है, तो
- राज्य का मुख्य वन्यजीव वार्डन ऐसे वन का नियंत्रक प्राधिकारी बन जाता है।
- ऐसे क्षेत्र में शिकार की अनुमति नहीं होती।
- ऐसे क्षेत्र के लोगों को गैर-इमारती लकड़ी वनोत्पाद को संग्रह करने की अनुमति होती है।
- ऐसे क्षेत्र के लोगों को पारंपरिक कृषि प्रथाओं की अनुमति होती है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
केवल एक
केवल दो
केवल तीन
सभी चार
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
- एक बार 'समुदाय प्रारक्षित' (Community Reserve) घोषित होने पर, मुख्य वन्यजीव वार्डन इसका संरक्षक बन जाता है और वहां शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाता है।
- समुदाय के लोगों को विनियमित तरीके से गैर-इमारती लकड़ी वनोत्पाद (NTFP) संग्रह करने का अधिकार होता है।
- कथन 4 गलत है क्योंकि ऐसे क्षेत्रों के भीतर नई या पारंपरिक कृषि प्रथाओं के विस्तार की सामान्य अनुमति नहीं होती है ताकि पारिस्थितिकी बनी रहे।
- कथन-I
- शिशुधानी-स्तनी (मार्सूपियल) प्राकृतिक रूप से भारत में नहीं होते।
- कथन-II
- शिशुधानी-स्तनी केवल परभक्षी-रहित पर्वतीय घास-स्थलों में ही पनप सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों के बारे में, निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है?
कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या है।
कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं, किन्तु कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या नहीं है।
कथन-I सही है, किन्तु कथन-II गलत है।
कथन-I गलत है, किन्तु कथन-II सही है।
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
- कथन-I सही है: शिशुधानी-स्तनी (जैसे कंगारू) मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया, तस्मानिया और अमेरिका में पाए जाते हैं; वे भारत में प्राकृतिक रूप से नहीं मिलते।
- कथन-II गलत है: यह कहना गलत है कि वे 'केवल' परभक्षी-रहित क्षेत्रों में पनपते हैं। वे विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों (जैसे वर्षावन, रेगिस्तान) में भी रह सकते हैं।
- वे भूमि में बिल बनाकर अपने नीड़ का निर्माण करती हैं।
- वे अपने भोज्य पदार्थों, जैसे कि दृढ़फलों (नट) और बीजों को भूमि के अंदर जमा करती हैं।
- वे सर्वभक्षी होती हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
कोई भी नहीं
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
- कथन 2 और 3 सही हैं। भारतीय गिलहरियाँ अक्सर बीजों और मेवों को जमीन में दबाकर जमा (Cache) करती हैं और वह कीड़े-मकोड़े भी खाती है।
- वे आमतौर पर पेड़ों की शाखाओं (शीर्ष पर) या खोखलों में अपने घोंसले बनाती हैं, न कि भूमि में बिल बनाती हैं।
- सिंह-पुच्छी मकाक
- मालाबार सिवेट
- सांभर हिरण
उपर्युक्त में से कितने आमतौर पर रात्रिचर हैं या सूर्यास्त के बाद अधिक सक्रिय होते हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
कोई भी नहीं
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
- मालाबार सिवेट और सांभर हिरण रात्रिचर (Nocturnal) जीव हैं जो रात में अधिक सक्रिय होते हैं।
- सिंह-पुच्छी मकाक (Lion-tailed Macaque) एक दिवाचर (Diurnal) जीव है, जो केवल दिन के उजाले में सक्रिय रहता है।
तितली
व्याध पतंग (ड्रैगनफ्लाई)
मधुमक्खी
बर्र
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
मधुमक्खियाँ अपने छत्ते के अन्य सदस्यों को भोजन की दिशा और सूर्य के सापेक्ष दूरी बताने के लिए 'वैगल डांस' (Waggle Dance) करती हैं। यह व्यवहार मधुमक्खियों के बीच संचार का एक जटिल और सटीक तरीका है।
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