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DAILY DOSE कार्यक्रम, IAS From Home का ऑनलाइन मेण्टरशिप कार्यक्रम है। घर से UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को समर्पित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिदिन के अध्ययन में अभ्यर्थियों की सहायता करना एवं उन्हें परीक्षा सम्बन्धी नियमित मार्गदर्शन प्रदान करना है ताकि उनकी तैयारी निरन्तर एवं सही दिशा में चलती रहे। इस कार्यक्रम में एक ऑडियो लेक्चर तथा मुख्य परीक्षा एवं प्रारम्भिक परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न शामिल होते हैं।


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मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास

निर्देश:—

नीचे दिये गये अभ्यास प्रश्न कल की विषयवस्तु पर आधारित हैं। यदि आपने इनमें से किसी एक प्रश्न का भी उत्तर लेखन अभ्यास किया है, तो इस Quiz के नीचे लगे बटन पर क्लिक करें। आपकी मासिक रिपोर्ट में यह अभ्यास जोड़ दिया जायेगा।

मुख्य परीक्षा (पिछले डोज़ की विषयवस्तु पर आधारित)

  1. "पर्यावरण केवल एक भौतिक स्थान नहीं है, बल्कि एक गतिशील स्व-नियामक तंत्र है।" इस कथन के आलोक में पर्यावरण की प्रमुख विशेषताओं की चर्चा कीजिए। [150 शब्द]
  2. "एन्थ्रोपोसीन (Anthropocene) युग ने मानव-पर्यावरण संबंधों को 'मैत्रीपूर्ण' से 'विनाशकारी' में बदल दिया है।" टिप्पणी कीजिए। [150 शब्द]
  3. "ग्रहीय सीमाओं" (Planetary Boundaries) की अवधारणा क्या है? वर्तमान वैश्विक पर्यावरणीय संकटों के समाधान में यह अवधारणा कितनी प्रासंगिक है? [250 शब्द]

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु अभ्यास

निर्देश:—

इस प्रश्नावली में कुल 10 प्रश्न हैं, जो कल की विषयवस्तु पर आधारित हैं। प्रत्येक प्रश्न 2 अंकों का है। गलत उत्तर पर एक तिहाई (⅓) ऋणात्मक मूल्यांकन किया जाएगा। न्यूनतम 50% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।

प्रारम्भिक परीक्षा (पिछले डोज़ की विषयवस्तु पर आधारित)

1.

'पर्यावरण' के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. पर्यावरण एक स्थिर संकल्पना है जो समय और स्थान के साथ अपरिवर्तित रहती है।
  2. इसमें स्व-नियामक क्षमता पाई जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

केवल I

केवल II

I और II दोनों

न तो I और न ही II

सही उत्तर (?) है।

व्याख्या:—

  • पर्यावरण एक गतिशील संकल्पना है जो समय और स्थान के साथ बदलती रहती है।
  • इसमें एक निश्चित सीमा तक स्वयं को संतुलित करने की क्षमता (होमियोस्टैसिस) होती है।

2.

पर्यावरण के घटकों के सन्दर्भ में, निम्नलिखित पर विचार कीजिए:

  1. सौर विकिरण
  2. मृदा की अम्लता
  3. पादप प्लवक (फाइटोप्लैंकटन)
  4. वायुमंडलीय आर्द्रता

उपर्युक्त में से कितने, पर्यावरण के अजैविक घटकों में शामिल किये जाते हैं?

केवल एक

केवल दो

केवल तीन

सभी चार

सही उत्तर (?) है।

व्याख्या:—

  • सौर विकिरण, मृदा की अम्लता (pH मान) और वायुमंडलीय आर्द्रता निर्जीव भौतिक-जलवायु कारक हैं। अतः ये अजैविक हैं।
  • पादप प्लवक (फाइटोप्लैंकटन) सूक्ष्मजीव हैं जो प्रकाश-संश्लेषण करते हैं, इसलिए इन्हें जैविक घटक की श्रेणी में रखा जाता है।

3.

पृथ्वी के 'आदिम वायुमंडल' (Primitive Atmosphere) के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

आदिम वायुमंडल मुख्य रूप से अपचायक (Reducing) प्रकृति का था क्योंकि इसमें मुक्त ऑक्सीजन का अभाव था।

पृथ्वी के ठंडे होने की प्रक्रिया के दौरान ज्वालामुखीय गैस उत्सर्जन ने इसके निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाई।

आदिम वायुमंडल की रासायनिक संरचना में हाइड्रोजन, मीथेन और अमोनिया जैसी गैसों की प्रधानता थी।

जीवन की उत्पत्ति से पूर्व वायुमंडल में ओजोन परत का पूर्ण विकास हो चुका था।

सही उत्तर (?) है।

व्याख्या:—

  • ओजोन परत (O₃) का निर्माण मुक्त ऑक्सीजन (O₂) की उपस्थिति पर निर्भर करता है।
  • आदिम वायुमंडल में ऑक्सीजन नहीं थी, इसलिए ओजोन परत का अस्तित्व भी नहीं था।
  • वास्तव में ओजोन परत का विकास महान ऑक्सीकरण घटना के बहुत बाद हुआ।
  • आरम्भिक जीवन का विकास गहरे जल में हुआ ताकि वे सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी विकिरणों से बच सकें।

4.

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 'सांस्कृतिक पर्यावरण' भौतिक पर्यावरण की सीमाओं के भीतर ही विकसित हो सकता है।
  2. अत्यधिक तकनीकी विकास मानव को पर्यावरण के 'अजैविक घटकों' की निर्भरता से पूर्णतः मुक्त कर सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

केवल I

केवल II

I और II दोनों

न तो I और न ही II

सही उत्तर (?) है।

व्याख्या:—

  • कथन I सही है क्योंकि संस्कृति का विकास संसाधनों (भौतिक पर्यावरण) पर आधारित होता है।
  • कथन II गलत है। तकनीक संसाधनों के उपयोग को कुशल बना सकती है, परन्तु मानव भोजन, जल और वायु जैसी मूलभूत निर्भरताओं से मुक्त नहीं हो सकता।

5.

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

कथन-I
साइनोबैक्टीरिया को पृथ्वी पर ऑक्सीजन क्रांति का जनक माना जाता है।
कथन-II
साइनोबैक्टीरिया पहले ऐसे जीव थे जिन्होंने जल के अणुओं को तोड़कर ऑक्सीजन मुक्त की।

उपर्युक्त कथनों के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है?

कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है।

कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं, किन्तु कथन-II, कथन-I की व्याख्या नहीं करता।

कथन-I सही है, किन्तु कथन-II सही नहीं है।

कथन-I सही नहीं है, किन्तु कथन-II सही है।

सही उत्तर (?) है।

व्याख्या:—

  • साइनोबैक्टीरिया प्रकाश संश्लेषण करने वाले जीवाणु हैं जिन्हें नीले-हरित शैवाल भी कहा जाता है।
  • इन्होंने जल के अणुओं को तोड़कर ऑक्सीजन मुक्त की।
  • इनके कारण वायुमंडल में ऑक्सीजन का संचय हुआ और जटिल जीवों के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ।

6.

पृथ्वी के उद्भव से लेकर वर्तमान जैवमंडल के विकास तक की निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिए:

  1. आरम्भिक वायुमंडल का निर्माण
  2. साइनोबैक्टीरिया का उदय
  3. महान ऑक्सीकरण घटना
  4. समतापमंडल में ओजोन परत का निर्माण

उपर्युक्त घटनाओं का आदिकाल से वर्तमान की ओर सही कालानुक्रमिक अनुक्रम कौन-सा है?

I - II - III - IV

II - I - III - IV

I - III - IV - II

II - I - IV - III

सही उत्तर (?) है।

व्याख्या:—

  • ज्वालामुखीय गैस उत्सर्जन से पृथ्वी का आरम्भिक वायुमंडल बना।
  • इसके पश्चात महासागरों में साइनोबैक्टीरिया का उदय हुआ।
  • इनके प्रकाश संश्लेषण से मुक्त ऑक्सीजन का संचय हुआ जिसे महान ऑक्सीकरण घटना कहा जाता है।
  • अंततः ऑक्सीजन और पराबैंगनी किरणों की क्रिया से ओजोन परत का निर्माण हुआ।

7.

निम्नलिखित में से कौन-सा उदाहरण पर्यावरण की स्व-नियामक क्षमता को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता है?

औद्योगिक क्षेत्रों में सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) के उत्सर्जन के कारण होने वाली अम्लीय वर्षा।

वायुमंडल में CO₂ के बढ़ते स्तर के जवाब में स्थलीय वनस्पतियों द्वारा प्रकाश संश्लेषण की दर में वृद्धि।

अत्यधिक चराई के कारण एक घास के मैदान का मरुस्थल में परिवर्तित हो जाना।

वनों की कटाई के कारण मृदा अपरदन की दर में होने वाली वृद्धि।

सही उत्तर (?) है।

व्याख्या:—

स्व-नियमन का अर्थ है कि किसी प्रणाली में परिवर्तन होने पर वह नकारात्मक प्रतिपुष्टि के माध्यम से संतुलन बहाल करने का प्रयास करती है। वायुमंडल में CO₂ बढ़ने पर पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण की दर बढ़ना इसी प्रकार की स्व-नियामक प्रतिक्रिया है।


8.

यदि पृथ्वी का अक्षीय झुकाव (23½°) समाप्त हो जाए, तो पर्यावरण के 'अजैविक घटकों' पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

  1. वैश्विक स्तर पर ऋतु परिवर्तन की प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी।
  2. विषुवत रेखा पर सौर विकिरण की तीव्रता में अत्यधिक कमी आएगी।
  3. वायुमंडलीय परिसंचरण के पैटर्न में भारी बदलाव आएगा।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

केवल I और II

केवल II और III

केवल I और III

I, II और III

सही उत्तर (?) है।

व्याख्या:—

  • अक्षीय झुकाव समाप्त होने पर ऋतुओं का परिवर्तन समाप्त हो जाएगा।
  • विषुवत रेखा पर विकिरण कम नहीं होगा, इसलिए कथन II गलत है।
  • तापमान वितरण में परिवर्तन के कारण वायुमंडलीय परिसंचरण के पैटर्न बदल जाएंगे।

9.

'जैवमंडल' के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. जैवमंडल की ऊर्ध्वाधर सीमाएँ वायुमंडल में केवल वहां तक हैं जहाँ तक ऑक्सीजन की सांद्रता श्वसन के लिए पर्याप्त है।
  2. जैवमंडल एक विवृत तंत्र है जिसमें ऊर्जा और पदार्थ दोनों का निर्बाध आदान-प्रदान होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

केवल I

केवल II

I और II दोनों

न तो I और न ही II

सही उत्तर (?) है।

व्याख्या:—

  • जैवमंडल की सीमाएँ केवल ऑक्सीजन पर निर्भर नहीं हैं; सूक्ष्मजीव ऊँचाई पर भी पाए जाते हैं।
  • जैवमंडल ऊर्जा के लिए खुला तंत्र है लेकिन पदार्थों के लिए मुख्यतः बंद तंत्र है।

10.

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

कथन-I
"नूतन संस्थाओं" (Novel Entities) को ग्रहीय सीमाओं (Planetary Boundaries) के अंतर्गत एक गंभीर वैश्विक खतरे के रूप में पहचाना गया है।
कथन-II
प्रकृति के पास सिंथेटिक रसायनों और माइक्रोप्लास्टिक्स जैसे मानव-निर्मित पदार्थों के अपघटन के लिए कोई पूर्व-विकसित तंत्र नहीं है।

उपर्युक्त कथनों के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है?

कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है।

कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं किन्तु कथन-II, कथन-I की व्याख्या नहीं करता।

कथन-I सही है किन्तु कथन-II गलत है।

कथन-I गलत है किन्तु कथन-II सही है।

सही उत्तर (?) है।

व्याख्या:—

नूतन संस्थाओं के अंतर्गत मानव निर्मित पदार्थ जैसे प्लास्टिक, कृत्रिम रसायन, नैनो-पदार्थ और जीन-संपादित जीव आते हैं।

चूँकि ये पदार्थ प्रकृति में पहले नहीं थे, इसलिए जैवमंडल के पास इनके अपघटन का कोई विकसित तंत्र नहीं है, जिससे ये पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा बनते हैं।

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