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DAILY DOSE कार्यक्रम, IAS From Home का ऑनलाइन मेण्टरशिप कार्यक्रम है। घर से UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को समर्पित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिदिन के अध्ययन में अभ्यर्थियों की सहायता करना एवं उन्हें परीक्षा सम्बन्धी नियमित मार्गदर्शन प्रदान करना है ताकि उनकी तैयारी निरन्तर एवं सही दिशा में चलती रहे। इस कार्यक्रम में एक ऑडियो लेक्चर तथा मुख्य परीक्षा एवं प्रारम्भिक परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न शामिल होते हैं।
आज की विषयवस्तु
- पारिस्थितिकी
- पारिस्थितिकी की संकल्पना
- पारिस्थितिक पदानुक्रम
- पारिस्थितिकी के आधारभूत नियम
- पारिस्थितिक तन्त्र
- परिभाषा
- पारिस्थितिक तन्त्र के घटक
- पारिस्थितिक तन्त्र की संरचना (diagram)
- पारिस्थितिक तन्त्र की विशेषताएँ
- पारिस्थितिक तन्त्रों का वर्गीकरण
- पारिस्थितिक तन्त्र को प्रभावित करने वाले कारक
- स्थलीय पारितन्त्र
- वन पारितन्त्र
- घास के मैदान
- मरुस्थलीय पारितन्त्र
- टुण्ड्रा पारितन्त्र
- जलीय पारितन्त्र
- स्वच्छ जल पारितन्त्र
- सागरीय (लवण) पारितन्त्र
- संक्रमणकालीन पारितन्त्र
- मानव-निर्मित पारितन्त्र
- कृषि पारितन्त्र
- एक्वाकल्चर पारितन्त्र
- वृक्षारोपण पारितन्त्र
- नगरीय पारितन्त्र
- औद्योगिक पारितन्त्र
- जल प्रबन्धन पारितन्त्र
आज का गृहकार्य (होमवर्क)
निम्नलिखित में से किसी एक प्रश्न के उत्तर लेखन का अभ्यास अवश्य करें। सम्भव हो, तो तीनों के उत्तर लिखें।
- "पारिस्थितिक तन्त्र की संरचना उसके घटकों की सक्रिय अन्त:क्रिया पर निर्भर करती है।" पारिस्थितिक तन्त्र के जैविक और अजैविक घटकों के मध्य सम्बन्धों की सोदाहरण विवेचना कीजिए। [150 शब्द]
- संक्रमणकालीन पारितन्त्र क्या हैं? पारिस्थितिक दृष्टिकोण से इनके महत्त्व एवं इनके समक्ष उपस्थित प्रमुख संकटों का परीक्षण कीजिए। [150 शब्द]
- मानव-निर्मित पारितन्त्र, प्राकृतिक पारितन्त्रों से किस प्रकार भिन्न हैं? नगरीय और कृषि पारितन्त्र के उदाहरण देते हुए इनके पारिस्थितिक प्रभावों की चर्चा कीजिए। [250 शब्द]
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास
निर्देश:—
नीचे दिये गये अभ्यास प्रश्न कल की विषयवस्तु पर आधारित हैं। यदि आपने इनमें से किसी एक प्रश्न का भी उत्तर लेखन अभ्यास किया है, तो इस Quiz के नीचे लगे बटन पर क्लिक करें। आपकी मासिक रिपोर्ट में यह अभ्यास जोड़ दिया जायेगा।
मुख्य परीक्षा (पिछले डोज़ की विषयवस्तु पर आधारित)
- यहाँ पर मुख्य परीक्षा का प्रश्न लिखें। [150 शब्द]
- यहाँ पर मुख्य परीक्षा का प्रश्न लिखें। [150 शब्द]
- यहाँ पर मुख्य परीक्षा का प्रश्न लिखें। [250 शब्द]
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु अभ्यास
निर्देश:—
इस प्रश्नावली में कुल 10 प्रश्न हैं, जो कल की विषयवस्तु पर आधारित हैं। प्रत्येक प्रश्न 2 अंकों का है। गलत उत्तर पर एक तिहाई (⅓) ऋणात्मक मूल्यांकन किया जाएगा। न्यूनतम 50% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।
प्रारम्भिक परीक्षा (पिछले डोज़ की विषयवस्तु पर आधारित)
पारिस्थितिक आवास एवं निकेत के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- आवास वह भौतिक स्थान होता है जहाँ कोई जीव या प्रजाति निवास करती है।
- प्रत्येक प्रजाति का एक विशिष्ट निकेत होता है जो उसके आवास में उसकी पारिस्थितिक भूमिका को दर्शाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
केवल I
केवल II
I और II दोनों
न तो I और न ही II
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
- कथन I सही है क्योंकि आवास (Habitat) वह भौतिक स्थान है जहाँ कोई जीव या प्रजाति प्राकृतिक रूप से निवास करती है और जहाँ उसे जीवन निर्वाह के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ प्राप्त होती हैं।
- कथन II भी सही है क्योंकि प्रत्येक प्रजाति की अपने आवास में एक विशिष्ट पारिस्थितिक भूमिका होती है, जिसे उसका निकेत (Niche) कहा जाता है।
यह एक ऐसा पादप है जिसकी पत्तियाँ वाष्पोत्सर्जन को न्यूनतम करने के लिए काँटों में रूपांतरित हो जाती हैं। तना गूदेदार एवं हरा होकर प्रकाश-संश्लेषण का कार्य करता है तथा इसकी जड़ें जल की खोज में मृदा में बहुत गहराई तक चली जाती हैं। यह विवरण निम्नलिखित में से किस आवास के पादप की सर्वाधिक सटीक व्याख्या करता है?
अल्पाइन आवास
मरुस्थलीय आवास
जलीय आवास
संक्रमणकालीन जलीय आवास
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
दिया गया विवरण 'मरुद्भिद' (Xerophytes) पौधों की विशेषता बताता है। मरुस्थलीय आवास में जल की कमी से निपटने के लिए पौधे 'पर्ण-रूपांतरण' करते हैं ताकि जल का ह्रास कम हो (पत्तियां काँटों में) और तना संचयन व भोजन बनाने का काम कर सके। इनकी जड़ें जमीन के नीचे जल स्तर तक पहुँचने के लिए लंबी हो जाती हैं।
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए—
| क्र. | जीव | आवास |
|---|---|---|
| I. | हिम तेंदुआ | उच्च तुंगता वाले पर्वत |
| II. | लाल पाण्डा | उष्णकटिबन्धीय मरुस्थल |
| III. | ड्यूगोंग | समुद्री घास के मैदान |
उपर्युक्त युग्मों में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
सभी तीन युग्म
कोई भी युग्म नहीं
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
- हिम तेंदुआ हिमालय के उच्च तुंगता वाले क्षेत्रों (3000-4500 मीटर) में पाया जाता है।
- लाल पांडा मरुस्थल में नहीं, बल्कि हिमालय के 'शीतोष्ण वनों' (Temperate Forests) में पाया जाता है। अतः युग्म-II सही सुमेलित नहीं है।
- ड्यूगोंग, जिसे 'समुद्री गाय' भी कहा जाता है, एक शाकाहारी समुद्री स्तनधारी है। यह उथले तटीय जल में पाया जाता है जहाँ यह 'समुद्री घास' खाता है।
जीवों की निम्नलिखित विशेषताओं पर विचार कीजिए:
- कान और पूँछ का छोटा होना
- रात्रि में विचरण करना
- त्वचा के नीचे वसा की मोटी परत
- पसीने की ग्रंथियों का अभाव
उपर्युक्त में से कितनी विशेषताएँ अत्यधिक ठण्डे वातावरण में जीवों के लिए अनुकूलन में सहायक हैं?
केवल एक
केवल दो
केवल तीन
सभी चार
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
दिए गए लक्षणों में से केवल बिन्दु I और III अत्यधिक ठण्डे वातावरण के लिए अनुकूलन हैं।
- छोटे कान और पूँछ (बिन्दु I) शरीर की सतह का क्षेत्रफल कम करते हैं जिससे ऊष्मा का ह्रास कम होता है (एलन का नियम)।
- वसा की मोटी परत (बिन्दु III) ठण्डे पानी या हवा के विरुद्ध शरीर के तापमान को स्थिर रखती है।
- रात्रि में विचरण (बिन्दु II) और पसीने की ग्रंथियों का अभाव (बिन्दु IV) मुख्य रूप से मरुस्थलीय या गर्म जलवायु के प्रति अनुकूलन के उदाहरण हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- कथन-I
- किसी भी प्रजाति की दीर्घकालिक उत्तरजीविता के लिए अनुकूलन एक अनिवार्य आवश्यकता है।
- कथन-II
- जो जीव बदलते पर्यावरणीय परिवर्तनों के अनुसार स्वयं को ढालने में विफल रहते हैं, वे विलुप्त हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों के सन्दर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है?
कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है।
कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं, किन्तु कथन-II, कथन-I की व्याख्या नहीं करता।
कथन-I सही है, किन्तु कथन-II सही नहीं है।
कथन-I सही नहीं है, किन्तु कथन-II सही है।
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
- अनुकूलन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव अपने पर्यावरण में सफलतापूर्वक रहने और प्रजनन करने के लिए अपने शरीर, कार्यप्रणाली या व्यवहार में बदलाव करता है।
- चूँकि प्राकृतिक वातावरण स्थिर नहीं रहता, इसलिए डार्विन के 'प्राकृतिक चयन' के सिद्धांत के अनुसार, केवल वही प्रजातियाँ बची रहती हैं जो इन परिवर्तनों के अनुकूल खुद को बदल लेती हैं।
- अतः कथन-II सीधे तौर पर यह समझाता है कि कथन-I में दी गई 'अनिवार्यता' क्यों जरूरी है।
पक्षियों में अनुकूलन के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- पक्षियों की हड्डियाँ अन्दर से खोखली होती हैं, जो शरीर के वजन को कम कर उड़ान में सहायता करती हैं।
- पक्षी 'असमतापी' जीव होते हैं, जिससे वे बाहरी वातावरण के अनुसार अपने शरीर का तापमान बदल लेते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
केवल I
केवल II
I और II दोनों
न तो I और न ही II
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
- कथन I सही है क्योंकि पक्षियों की हड्डियाँ न्यूमैटिक (Pneumatic) होती हैं, जिनमें हवा भरी होती है। यह भार को कम कर उन्हें उड़ने के लिए हल्का बनाता है।
- कथन II गलत है क्योंकि पक्षी 'समतापी' (Homeothermic/Warm-blooded) जीव होते हैं। इसका अर्थ है कि वे अपने शरीर का तापमान स्थिर बनाए रखते हैं और इसे बाहरी वातावरण के अनुसार नहीं बदलते।
- उड़ान जैसी ऊर्जा-गहन गतिविधि के लिए एक निरन्तर उच्च चयापचय दर और स्थिर शारीरिक तापमान आवश्यक होता है।
पर्यावरणीय अनुकूलन के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन 'असत्य' है?
कुछ पादप प्रजातियाँ नाइट्रोजन की कमी वाली मृदा में जीवित रहने के लिए कीटों का भक्षण कर उनसे आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त करती हैं।
घास के मैदानों में पाए जाने वाले कुछ पादप बार-बार लगने वाली आग से बचने के लिए अपने भूमिगत अंगों (जैसे प्रकंद) में ऊर्जा संचित रखते हैं ताकि आग के बाद वे पुन: तेजी से उग सकें।
गहरे समुद्र के जीवों में अत्यधिक उच्च दबाव को सहने के लिए उनके शरीर में वायु से भरे हुए बड़े फेफड़े और विशाल अस्थि-पंजर पाए जाते हैं।
कुछ परजीवी जीव अपने मेजबान के शरीर से चिपकने के लिए विशेष प्रकार के हुक या चूषक विकसित कर लेते हैं और अपने पाचन तन्त्र को त्याग देते हैं।
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
कथन (c) असत्य है क्योंकि गहरे समुद्र (Deep Sea) के जीवों में अत्यधिक जल-दाब को सहने के लिए उनके शरीर में वायु से भरे अंग (जैसे फेफड़े या एयर ब्लैडर) लगभग नहीं होते, क्योंकि भारी दबाव के कारण वे पिचक सकते हैं। इसके बजाय, उनका शरीर लचीला होता है और उनमें हड्डियों का ढाँचा बहुत कम या नरम होता है।
अन्य सभी कथन—कीटभक्षी पौधों द्वारा नाइट्रोजन प्राप्त करना, घास के मैदानों में आग के प्रति अनुकूलन 'पायरोफाइट्स' (Pyrophytes), और परजीवियों द्वारा पाचन तन्त्र का त्याग करना—व्यावहारिक सत्य हैं।
प्रकृति में जीवों द्वारा स्वयं को बचाने और शिकार करने के लिए अपनाई गई रणनीतियों के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- कुछ कीट और सरीसृप अपने आसपास के वातावरण (जैसे पत्ती या टहनी) के समान रंग और आकार बदल लेते हैं ताकि वे शिकारियों को दिखाई न दें।
- कुछ विषहीन साँप और कीट अपने शरीर की बनावट और व्यवहार को बिल्कुल किसी जहरीले जीव जैसा बना लेते हैं ताकि शिकारी उन्हें खाने से डरें।
- कुछ समुद्री मछलियाँ अपने शरीर के निचले हिस्से को चमकीला और ऊपरी हिस्से को गहरा रखती हैं, जिससे वे ऊपर और नीचे दोनों तरफ से आने वाले शिकारियों के लिए अदृश्य हो जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
केवल I और II
केवल II और III
केवल I और III
I, II और III
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
- कथन-I 'छद्मावरण' (Concealment) का उदाहरण है जैसे स्टिक इंसेक्ट या लीफ इंसेक्ट। इसमें जीव अपने रंग और आकार को परिवेश के अनुसार बदल लेता है।
- कथन-II 'अनुहरण' (Mimicry) कहलाता है, जहाँ एक कमजोर जीव खुद को खतरनाक दिखाने के लिए किसी विषैले जीव की नकल करता है।
- कथन III को 'काउंटर-शेडिंग' (Counter-shading) कहा जाता है। जब नीचे से देखा जाए तो उनका चमकीला पेट आकाश की रोशनी में मिल जाता है और ऊपर से देखने पर उनका गहरा रंग समुद्र की गहराई में छिप जाता है।
निम्नलिखित विवरण पर विचार कीजिए:
वाइसरॉय तितली देखने में बिल्कुल मोनार्क तितली जैसी लगती है। मोनार्क तितली अपने शरीर में संचित रसायनों के कारण शिकारियों के लिए अरुचिकर होती है, जिससे पक्षी उसे नहीं खाते। वाइसरॉय तितली, जो स्वयं ऐसी नहीं होती, मोनार्क के समान रंग और पंखों का पैटर्न विकसित कर लेती है ताकि शिकारी उसे भी मोनार्क समझकर छोड़ दें।
उपर्युक्त विवरण किस प्रकार के पर्यावरणीय अनुकूलन का सबसे सटीक उदाहरण है?
छद्मावरण (Camouflage)
अनुहरण (Mimicry)
सहभोजिता (Commensalism)
प्रति-छायांकन (Counter-shading)
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
- छद्मावरण (Camouflage): इसमें जीव अपने परिवेश (जैसे मिट्टी या पत्ती) के रंग में घुल-मिल जाता है ताकि वह शिकारी को दिखाई न दे।
- अनुहरण (Mimicry): इसमें एक कमजोर जीव किसी दूसरे 'खतरनाक या अरुचिकर जीव' की नकल करता है ताकि शिकारी उसे खाने से डरे।
- सहभोजिता (Commensalism): दो जीवों के मध्य ऐसा सम्बन्ध जिसमें एक को लाभ होता है और दूसरे को न तो लाभ होता है और न ही हानि।
- प्रति-छायांकन (Counter-shading): इसमें जीव का ऊपरी हिस्सा गहरा और निचला हिस्सा हल्का होता है, जिससे वह ऊपर और नीचे दोनों तरफ से आने वाले शिकारियों के लिए अदृश्य हो जाता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- कथन-I
- मैंग्रोव पादपों की जड़ें गुरुत्वाकर्षण के विपरीत ऊपर की ओर वृद्धि करती हैं।
- कथन-II
- मैंग्रोव क्षेत्रों की मृदा में उच्च लवणता और ऑक्सीजन की कमी होती है।
उपर्युक्त कथनों के सन्दर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है?
कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है।
कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं, किन्तु कथन-II, कथन-I की व्याख्या नहीं करता।
कथन-I सही है, किन्तु कथन-II सही नहीं है।
कथन-I सही नहीं है, किन्तु कथन-II सही है।
सही उत्तर (?) है।
व्याख्या:—
- मैंग्रोव वनों की दलदली मृदा में जलजमाव के कारण ऑक्सीजन का अभाव होता है। इस प्रतिकूल परिस्थिति से निपटने के लिए इन पौधों में विशेष प्रकार की जड़ें पाई जाती हैं जिन्हें 'न्यूमेटाफोर्स' (Pneumatophores) कहा जाता है।
- ये जड़ें ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती (Negative Geotropic) होती हैं और वायुमंडल से सीधे ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए जमीन से ऊपर निकल आती हैं।
- चूँकि कथन-II मृदा की उस कमी को बताता है जिसके कारण जड़ों को ऊपर आना पड़ता है, इसलिए यह कथन-I की सही व्याख्या करता है।
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